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मोदी के मूड पर मूडीज की मुहर

Posted On 18 Nov, 2017 Politics में

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अभिनय आकाश
विपक्ष ने नोटबंदी को संगठित लूट व गुड्स एंड सर्विस टैक्स यानि जीएसटी को गब्बर सिंह टैक्स बताया था. लेकिन अमेरिकन रेटिंग एजेंसी मूडीज ने भारत की रेटिंग बढ़ा दी है. यानि जिसे विपक्ष गब्बर सिंह कह रहे थे वह असल में ठाकुर और नोटबंदी और जीएसटी देश की अर्थव्यवस्था के जय और वीरू निकले. पिछले एक साल से लगातार अर्थव्यवस्था की आलोचना और भारत की आर्थिक हालत ख़राब होने की बात सुनने को मिल रही थी. तमाम विपक्षी दल भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर सरकार को घेरती नज़र आ रही थी. लेकिन जीएसटी और नोटबंदी जैसे सुधारों की वजह से ही अंतरराष्ट्रीय एजेंसी भारतीय अर्थव्यस्था की तारीफ कर रही है. विपक्ष भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर तमाम मापदंड पढ़ पाने में नाकाम हो गए जो मूडीज ने पढ़ लिए. मूडीज की यह रेटिंग विश्व समुदाय को भारत की ओर नए सिरे से ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रेरित करने में मददगार साबित होगा.
बता दें की मूडीज एक ग्लोबल रेटिंग एजेंसी है जिसने रेटिंग देने की शुरुआत वर्ष 1909 में की थी. इसका मकसद निवेशकों को एक ग्रेड देना है ताकि बाज़ार में उनकी साख बन सके. यह रेटिंग निवेशकों को किसी भी देश में निवेश करने से जुड़े हुए खतरे बताती है. किसी देश के कहने पर क्रेडिट रेटिंग एजेंसी देश के आर्थिक और राजनीतिक हालातों का मूल्यांकन कर उस देश की रेटिंग तय करती है. विकासशील देशों के लिए अच्छी रेटिंग लाना बहुत जरुरी माना जाता है. इससे देश को अंतरराष्ट्रीय बाज़ार से फंडिंग मिलती है और विदेशी निवेश बढ़ता है. मूडीज ने भारत की रेटिंग 13 वर्षों के बाद सुधारी है. यह एक संयोग ही है कि इसके पहले ऐसा फैसला 2004 में तब हुआ था जब केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार थी. जब मूडीज ने 2004 में भारत की रेटिंग बीएए3 की थी, जो अब बढ़कर बीएए2 हो गयी है. एजेंसी ने रेटिंग देने के लिए नौ सिंबल तय किए हैं. ये एएए, एए, ए, बीएए, बीए, बी, सीएए, सीए और सी हैं. एए से लेकर सीएए तक 1,2,3 सब कैटेगरी भी होती है. जिस देश की रेटिंग एएए है वहां निवेश का सबसे अच्छा माहौल माना जाता है और जिस देश की रेटिंग सी है वहां निवेश और अर्थव्यवस्था का माहौल सबसे ख़राब माना जाता है. एएए रेटिंग में अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, कनाडा, नीदरलैंड, नोर्वे, सिंगापुर, स्विजरलैंड और स्वीडन शामिल हैं. चीन की रेटिंग ए1 है जो भारत से काफी अच्छी है जबकि पाकिस्तान की रेटिंग भारत से काफी नीचे यानि बी3 है.
गौरतलब है कि मूडीज के रेटिंग में सुधार देश की सरकार द्वारा लिए जा रहे निर्णयों, उनका अर्थव्यवस्था पर किस तरह का असर पड़ रहा है जैसे आधारों पर लिया जाता है. मूडीज के अनुसार मोदी सरकार सरकारी कर्ज को भी कम करने की ओर कदम उठा रही है. मूडीज का मानना है कि मोदी सरकार ने सरकारी कर्ज के वृद्धि का जोखिम कम कर दिया है. इसके अलावा नोटबंदी के बाद देश की अर्थव्यवस्था का डिजिटल होने की तरफ बढ़ाया गया कदम. आधार कार्ड को जरुरी पहचान पत्र बनाना, आधार कार्ड और पैन कार्ड को लिंक किया जाना भी फायदेमंद रहा. देश में एक टैक्स प्रणाली जीएसटी लागू होने से भी अर्थव्यवस्था को फायदा हुआ है. मूडीज ने अपने रिपोर्ट में भारत की जीडीपी ग्रोथ 2018 के अंत तक 7.5% रहने की संभावना जताई है.
विपक्षी नेताओं के साथ-साथ असंतोष से भरे एनडीए के कुछ नेता मोदी सरकार की नीतियों को भारतीय अर्थव्यवस्था का बेड़ा गर्क करने वाला बता रही थी. जबकि पिछले तीन हफ़्तों के भीतर ही भारत की अर्थव्यवस्था से जुड़ी अच्छी ख़बरें की हैट्रिक लग गयी है. पहले वर्ल्ड बैंक की ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस की रिपोर्ट में भारत की रैंक में 30 अंकों का सुधार हुआ था. 189 देशों की लिस्ट में भारत 100 वें पायदान पर आ गया है. इसके बाद प्यू रिसर्च की सर्वेक्षण रिपोर्ट में 83% लोगों ने मौजूदा अर्थव्यवस्था को अच्छा बताया था. ऐसे में अब मूडीज ने देश के आर्थिक सुधारों को अपना समर्थन देते हुए भारत की रेटिंग सुधार दी है. ऐसे में रेटिंग सुधारना सबके लिए अच्छी खबर है जो वैश्विक स्तर पर भी सकारात्मक नजरिया बनाने में सहायक होने के साथ ही निवेशकों को आकर्षित करने में भी कारगर साबित होगी.



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